Thursday, April 2, 2020
दुश्मन गुफा के द्वार तक आकर उन्हीं कदमों लौट गया। उनमें से किसी ने भी अंदर झांककर नहीं देखा। तब अबू-बक्र (रजि.) ने आपके कान में कहा था, यदि इनमें से किसी की दृष्टि अपने पांव पर पड़ जाए तो ये हमें देख लें। आपने (सल्ल.) पूछा, अबू-बक्र (रजि.) उन...
पिछले कुछ समय में जिस प्रकार की घटनाएं हमारे देश में हुई है वे हमारी पूर्वग्रह सोच का ही निष्कर्ष हैं। चाहे दादरी में हुआ अखलाख हत्याकांड हो अथवा हाल ही में अलवर राजस्थान में हुई घटना हों। लोग बिना जांच पड़ताल के ही नतीजे पर पहुंच जाते हैं...
"भारत में मेडिकल शिक्षा कुछ स्थायी मिथकों से घिर गई है जिन्हें तोड़ना सबसे ज़रूरी है। ख़ानदानी और कुलीन परिवारों के कब्ज़े से इसे निकालने के लिए व्यापक सामाजिक समूह को भी मेडिकल शिक्षा के दायरे में लाना पड़ेगा। इन लोगों ने जानबूझ कर यह बात लोगों के दिमाग़...
peer ali khan freedom fighter hanged in 1857 feature image
ध्रुव गुप्त बिहार की राजधानी पटना में शहीद एक पीर अली खान के नाम पर एक छोटा सा पार्क है और शहर से हवाई अड्डे को जोड़ने वाली एक सड़क भी। शहर में उनकी मज़ार भी है और उनके नाम का एक मोहल्ला पीरबहोर भी। पिछले आठ सालों से बिहार...
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नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे सही नहीं हैं। यानी नाम छिपा लिए गये हैं। क्योंकि जिस घटना को मां-बाप ने ये कहकर छिपाया है और बेटे को समझा रहे हैं...
आतंकवाद के आरोप में पकडे गए निर्दोष मुसलमान. जिस तरह जेलों में 5-5 , 10-10 सालों तक निर्मम , अमानवीय यातनाएं सहने के बाद एक-एक कर के बा इज्ज़त बरी होते जा रहे हैं , और जिस तरह इसके बाद भी हर अलर्ट के बाद मुसलमानों को गिरफ्तार किया...
झारखण्ड मे आज़ाद और मज़लूम का जिस तरह से क़त्ल किया गया है उस से एक बात साफ़ हो गई है ,अब देश मे आज़ादी और मज़्लूमियत को भी खतरा हो गया है | आज़ाद को कैसा आज़ाद था की उसे अपने जानवर हांकने की भी आज़ादी नहीं है,मज़लूम...
मुझे पुरानी चीजें इकट्ठी करने का बहुत शौक है। आज भी मैंने मेरी पुरानी किताबें, कलम, सिक्के और डायरियां बहुत संभालकर रखी हैं। मुझे यह शौक मेरे नाना स्व. श्री भगवानाराम शर्मा से मिला। वे बहुत प्यारे इन्सान थे जिन्हें मैं रोज याद करता हूं। उनके पास पुरानी मालाएं,...
सेक्युलरिज़्म के अलमबरदार अपूर्वानंद ने द वायर में एक लेख लिखा है। जिसका शीर्षक है। के "जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक विश्वविद्यालय है। इस्लाम के प्रचार का केंद्र नहीं है।" मैं अपूर्वानंद और द वायर से पूछना चाहूंगा के वो जेएनयू के बारे में कब ऐसा लेख लिखने वाले हैं। "जेएनयू एक विश्वविद्यालय है। कम्युनिज्म...
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घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए। दो चार बड़ी हेडलाइन खोज कर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं। राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा...

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