Sunday, February 28, 2021
देखते देखते चार साल बीत गए मगर मोदी सरकार ने जिस कारपोरेट के लिए जान लगा दिया उसने अभी तक कोई अच्छी ख़बर सरकार को नहीं दी है। इस वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के कोरपोरेट के नतीजे चार साल में सबसे ख़राब हैं। कंपनियां मुनाफे के लिए काम...
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भारत के दोनों सदनों द्वारा पारित ऐसा कानून जो देश के 6 से 14 के सभी बच्चों को निःशुल्क,अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात करता है उसके सात साल पूरे होने के बाद उपलब्धियों के बारे में सोचने को बैठें तो पता चलता है कि यह कानून अपना...
देश 1857 के स्वाधीनता संग्राम की वर्षगांठ मना रहा है। इस मौके पर आज हम स्वाधीनता संग्राम के कई विस्मृत नायकों में एक मौलाना अहमदुल्लाह शाह फैज़ाबादी को याद करते हैं जिन्हें इतिहास ने वह दर्ज़ा नहीं दिया जिसके वे हक़दार थे। फ़ैजाबाद के ताल्लुकदार घर में पैदा हुए...
इस बीच आई पी एल मैच के उद्घाटन को 21 करोड़ 90 लाख लोगों ने देखा है। पिछली बार के उद्घाटन मैच की तुलना में 31 प्रतिशत दर्शक अधिक आए हैं, उसका कारण यह है कि हिन्दी जगत में टीवी का विस्तार 30 प्रतिशत हुआ है। राजनीति में जो...
देशद्रोह मामले में कन्हैया कुमार को मिली 6 महीने की अंतरिम ज़मानत से एक बात तो तय है की बीजेपी सरकार बैकफुट पर है और इसके चलते लोगों को खासकर छात्रों को उम्मीद है के अब रोहित वेमुला को इन्साफ मिलेगा।   जिस तरह तिहाड़ जेल से छूटने के बाद कन्हैया...
ज्ञान सिंह संघा, 20 नवंबर 1992 जयमल सिंह पड्डा, 17.3.1988 सरबजीत सिंह भिट्टेवड, 2.5.1990 तीन नाम हैं। जिन्होंने इंसानियत के लिए अपनी जान दी। पंजाब जब उग्रवाद की चपेट में था  तब पंजाब के भीतर लोग उसका मुकाबला कर रहे थे। ये वो नाम हैं जो इतिहास में बड़े नाम नहीं कहलाए...
सफ़ेद कबूतर हमेशा से प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इन दिनों इसी परिन्दे से भारतीय सेना परेशान है. हो भी तो क्यों न? इस पाकिस्तानी परिन्दे ने भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ जो कर दी है. पिछले दिनों भारत पाकिस्तान की सीमा पर स्थित मनवाल गाँव...
आज तमाम दुनिया देहश्तगर्दी पर अपने आंसू बहा रही है । कोई किसी मज़हब को उसका ज़िम्मेदार मान रहा है और कोई दूसरे पर इलज़ाम साज़ी कर रहा है । आज के दौर में जो मुसलमानो के मुल्को का हाल है उससे कोई बेख़बर नहीं है ,सब जानते है...
ठीक आज से 85 साल पहले 23 मार्च 1931 का दिन उन आम दिनों की तरह ही शुरू हुआ जब सुबह के समय राजनीतिक बंदियों को उनके बैरक से बाहर निकाला जाता था...। आम तौर पर वे दिन भर बाहर रहते थे और सूरज ढलने के बाद वापस अपने बैरकों...
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कोहराम न्यूज़ के लिए दीप पाठक  कुछ नहीं मंदिरों की जगह पगोडा/बौद्ध मठ बढ जायेंगे वो लोग सर मुडाए भिक्खु बन जायेंगे, घंटी की जगह हाथ से घुमाने वाला झुनझुना होगा और मुंह में "ऊं मनि पद्मे हुम" मंत्र होगा और वो शेष आबादी के लिए 'ड़ोम, चमार, हरिजन के...