Thursday, May 13, 2021
हाल के दिनों में बेरोज़गारी बढ़ी है। यह अच्छी ख़बर है क्योंकि इससे पता चलता है कि श्रम भागीदारी दर ( labour participation rate) बढ़ रही है। यह कहना है CMIE के महेश व्यास का। यह संस्था रोज़गार के सवाल पर नए नए आंकड़ें पेश करती रहती है और...
सबहि नचावत ट्रंप गुसाई ! अब थोड़ा-थोड़ा समझ में आने लगा है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक घोषणा की कि भारत कुछ बड़ा करने वाला है। अगले ही दिन भारतीय वायु सेना के विमानों...
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आज भी देश के आम आदमी के मनोविज्ञान और भरोसे पर मोदी ब्रांड की पकड़ बरकरार है। जब बात देश की आती है तो इस देश के आम आदमी के सामने आज भी मोदी का कोई विकल्प नहीं है। 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप...
मुझसे हंसा नहीं जा रहा है। बहुत लोग हंस रहे हैं। सकल घरेलु उत्पाद जीडीपी की दर 5 फ़ीसदी पर आ गई है। यह हंसी कहीं मुझे क्रूर न बना दे इसलिए सतर्क हूं। लाखों लोगों की नौकरी चली गई है। लाखों लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है।...
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कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एक महीने के लिए चैनलों में प्रवक्ता न भेजने का एलान किया है। कांग्रेस का यह फैसला मीडिया और राजनीति के हित में है। कम से कम कांग्रेस के हित में तो है। क़ायदे से कांग्रेस को यह काम चुनाव के पहले...
राजस्थान के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा 'जेएनयू में रोजाना 3 हजार उपयोग किए गए कंडोम मिलते हैं', सोशल मीडिया पर खुद बने मजाक और पार्टी को किया शर्मिंदा. रामलीला में परमज्ञानी रावण का किरदार निभाते निभाते राजस्थान के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा अपने आप को परम ज्ञानी समझने...
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सुषमा स्वराज ना तो  नरेन्द्र मोदी की तरह आरएसएस से निकली है और ना ही योगी आदित्यनाथ की तरह हिन्दु महासभा से । सुषमा स्वराज ने राजनीति में कदम जयप्रकाश नारायण के कहने पर रखा था और राजनीतिक तौर पर संयोग से पहला केस भी अपने पति स्वराज के...
रवीश कुमार इस तरह के मैसेज वाले जाने कितने वीडियो देख चुका हूं जिसमें पुलिस लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रही है। दुकाने तोड़ रही है। कार और बाइक तोड़ रही है। घरों में घुसकर मारने और गलियों में घुसकर मारने के बहुत सारे वीडियो वायरल हैं। इन्हें देखकर...
ठीक आज से 85 साल पहले 23 मार्च 1931 का दिन उन आम दिनों की तरह ही शुरू हुआ जब सुबह के समय राजनीतिक बंदियों को उनके बैरक से बाहर निकाला जाता था...। आम तौर पर वे दिन भर बाहर रहते थे और सूरज ढलने के बाद वापस अपने बैरकों...
जब मुहम्मद (सल्ल.) को यह मालूम हुआ कि मक्का से कुरैश यहां मुसलमानों पर युद्ध थोपने आ रहे हैं तो समझ गए कि यह एक निर्णायक समय बिंदु है। कुरैश से शांति, संधि, सिद्धांत और भाईचारे की जितनी बातें करनी थीं, कर चुके। उनके लिए पूरा मक्का छोड़ आए।...