rahul gandhi 1
क्या 16 मई 2014 के बाद 11 दिसबंर 2018 की तारीख भारतीय राजनीति के लिये बहुत अहम् साबित होने वाली है ? ऐसा माना जा रहा है कि इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद देश के राजनीति की दिशा बदल सकती है और...
ravish583
सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकारें अब उदासीन बने रहना छोड़ दें। नौजवान यह समझने लगा है कि भर्ती का एलान नौकरी देने के लिए कम, नौकरी के नाम पर सपने दिखाने के लिए ज़्यादा होता है। जब उस भर्ती की प्रक्रिया को पूरा होने में कई...
punya1
ये पहली बार होगा कि तीन राज्यो के चुनाव परिणाम देश की राजनीति पर ही नहीं बल्कि देश के इकनामिक माडल पर भी असर डालेगें । खास तौर से जिस तरह किसान-मजदूर के मुद्दे राजनीतिक प्रचार के केन्द्र में आये । और ग्रामिण भारत के मुद्दो को अभी तक...
sec
प्रिय भाइयों और उनकी बहनों मैं सेक्युलरिज़्म का विरोधी नहीं हूँ । मैं सेकुलरिज्म का हामी हूँ क्यूँ कि कुरान में लिखा है "लकुम दीनुकुम वालियादीन" (तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए मेरा दीन मेरे लिए) और मेरा उस पर पूरा ईमान है । मैं भी सेकुलरिज्म का अर्थ यही समझता...
ij
दिल्ली में लाखों किसान जुटे, क्यों? जवाब साफ है किसानों के हक और इंसाफ के लिए। ऐसे ही तमाम लोग मुल्क में जुटते हैं। गुजरात में दलितों, पाटीदारों ने हक के लिए जुट कर सरकार की नाक में दम कर दिया। भीमा कोरेगांव में दलितों की जुटान भी आपको...
punya1
बीजेपी या काग्रेस ही नहीं बल्कि देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां भी जानती है कि 11 दिसबंर के बाद देश की राजनीति बदल जायेगी । और संभवत पांच राज्यो से इतर देश में वोटरो का एक बडा तबका भी मान रहा है कि पांच राज्यो के जनादेश से 2019...
मुहम्मद आरिफ दागिया बाबरी मस्जिद नाम है एक ज़ख्म का, जो आज भी हरा है। एक घाव का, जो आज भी रिस रहा है। एक धोखे का, जो इसी के नाम पर सुप्रीम कोर्ट को दिया गया था। और यह नाम है एक मस्जिद का, जिसे बाबर ने नहीं बनाया...
pras
इनकांउटर हर किसी का होगा जो सत्ता के खिलाफ होगा । इस फेरहिस्त में कल तक पुलिस सत्ता विरोधियो को निशाने पर ले रही थी तो अब पुलिसवाले का ही इंनकाउटर हो गया क्योकि वह सत्ता की धारा के विपरीत जा रहा था । बुलंदशहर की हिंसा के बाद...
ये उसी शिखर अग्रवाल की पोस्ट है जिसने तीन दिसंबर की सुबह को खेतों में गाय कटी हुई देखी। दो दिसंबर की सुबह में इसने सभी स्वयंसेवकों की मीटिंग रखी और अगले दिन गाय कटी हुई प्राप्त हुईं। यदि सही और ईमानदारी से जांच हो तो पता चलेगा कि...
क्या पत्रकारिता की धार भोथरी हो चली है । क्या मीडिया - सत्ता गठजोड ने पत्रकारिता को कुंद कर दिया है । क्या मेनस्ट्रीम मीडिया की चमक खत्म हो चली है । क्या टेक्नॉलॉजी की धार ने मेनस्ट्रीम मीडिया में पत्रकारो की जरुरतो को सीमित कर दिया है ।...

ताज़ा समाचार