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कोहराम न्यूज़ की स्थापना 2014 में लोकसभा चुनावों से पूर्व 2 अप्रैल को हुई थी. जिसका प्रमुख उद्देश्य समाज के उन पहलुओं को सामने रखना था जिनकी खबर अखबार के अन्दर वाले पन्नों पर किसी छोटे से कॉलम में प्रकाशित होती है. अल्पसंख्यक, दलित, महिलाओं , मजदूरों, किसानों से जुडी समस्याओं को उठाना कोहराम न्यूज़ का सर्वप्रथम मकसद है. ऐसे समय में जब मीडिया को गोदी मीडिया कहा जा रहा है तब भी कोहराम न्यूज़ अपने मकसद से ज़रा भी नही भटका और मुद्दों पर बात करने वाला 5.6 लाख रीडर्स का चहेता न्यूज़ पोर्टल बन गया.

यह कोहराम न्यूज़ ही था जिसने उन लोगो को पहचान दी जिन्हें लिखने का शौक था लेकिन बड़े न्यूज़ चैनल्स की अनदेखी के कारण हाशिये में धकेल दिए गये थे. देश विदेश से लेकर स्थनीय खबरों तक कोहराम न्यूज़ ने हर तरह अपनी पकड़ मज़बूत रखी लेकिन जैसा की किसी भी कार्य को सुचारू तथा प्रोफेशनल ढंग से चलाने के लिए आर्थिक मदद की ज़रूरत होती है वैसे ही कोहराम न्यूज़ की इनकम का एक मात्र सोर्स विज्ञापन है.

इसी वर्ष 1 जनवरी से सोशल मीडिया ने अपनी पॉलिसीस में बदलाव कर दिया है. इस कारण आपको आपकी वाल पर न्यूज़ चैनल की पोस्ट बहुत कम दिखाई जाएँगी. जिस कारण कोहराम न्यूज़ को सुचारू रूप से मैनेज करने में परेशानी का सामना हो रहा है. अगर आप चाहते है की कोहराम न्यूज़ इसी तरह आपको खबरें मुहैया कराता रहे तो इसकी वित्तीय मदद कर सकते हैं. धन्यवाद