Saturday, May 15, 2021

इंडियन के डीएनए में सिर हिलाना, जो करता है विदेशियों को परेशान

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ब्रिटिश मूल के अमेरिकी लेखक मार्गोट बिट ने विदेशी सैलानियों के लिए मार्गदर्शन हेतु एक किताब लिखी है। जिसमे उनके बर्ताव के बारे मे लिखा गया है। ये किताब भारत आने वाले विदेशी सैलानियों के लिए मार्गदर्शक का काम करती है।

इस किताब में दावा किया गया कि सिर हिलाकर जवाब देने का यह बर्ताव हर भारतीय के डीएनए में है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें विरासत में मिलता आया है। हालांकि इंडियन की यह आदत विदेशियों को परेशान करती है।

दरअसल, हमारे यहाँ सिर हिलाकर संवाद, सबको खुश करने का तरीका माना जा सकता है, लेकिन कई बार लोग इस तरीके से परेशान होते हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए बहुत बड़ी पहेली बन जाता है। ये हां या ना में सिर हिलाना ही नहीं होता।

अक्सर गले के इशारे से हम बहुत सी बातें कह जाते हैं। जो न इनकार होती हैं और न ही इकरार। टूरिस्ट जब दुकानदारों से खरीदारी कर रहे होते हैं, तो अक्सर वो सामने वाले के संकेत समझ ही नहीं पाते। कई बार तो हम भारतीय भी सिर हिलाने का मतलब नहीं समझ पाते।

ब्रिटिश मूल की अमरीकी यात्रा लेखक मार्गोट बिग ने भारत में पांच साल से ज्यादा का वक्त गुजारा है। उन्होंने भारत आने वाले सैलानियों के लिए गाइडबुक्स लिखी है। उनका मानना है कि भारत में लोगों के तमाम तरह से सिर हिलाने के अलग-अलग मायने होते हैं, जैसे..

– एक तरफ सिर झुकाकर हिलाने का मतलब हां होता है या फिर इससे चलने का भी इशारा होता है।

– आगे-पीछे कुछ देर तक सिर हिलाने का मतलब होता है कि बात समझ में आ गई।

– जितनी तेज सिर हिलाया जाएगा, उसका मतलब तेजी से रजामंदी जाहिर की जा रही।

– भौंहे चढ़ाकर सिर हिलाने का मतलब कि फटाफट आप की बात मान ली गई है।

– दूसरी तरफ इसका मतलब यह भी हो सकता है कि ‘जो तुम कह रहे हो तो ठीक ही है’। ये ठीक उसी तरह है जैसे कंधे उचकाकर लोग ये इशारा करते हैं कि उन्हें फर्क नहीं प़़डता।

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