Tuesday, June 15, 2021

 

 

 

नागौर। यहां निकाह की अनोखी शर्त, न खाना न दहेज सिर्फ दो कप चाय

- Advertisement -
- Advertisement -

नागौर। नागौर जिले में बासनी बेलीमा एक ऐसा गांव है जो पूरे देश के अल्पसंख्यकों के लिए प्रेरणादायक है.यहां न कोई दहेज लेता है और न देता. बड़ा भोज और दावत भी नहीं, सिर्फ दो कप चाय पिला कर निकाह की खुशियां मनाई जाती है.इस गांव की बैतूल माल सोसायटी द्वारा की गई इस पहल की आसपास के गांवों में प्रशंसा तो हो ही रही है साथ ही क्षेत्र के लोग भी इसे एक बड़ी पहल मान रहे हैं.गांव के मोहम्मद अनवर बताते हैं कि हमारे गांव में दहेज का लेना देना पूरी तरह बैन है. उनकी पोती सुमैया का निकाह भी कुछ समय पहले ही किया है. उन्होंने पौती को एक लोटा और कुरान शरीफ देकर विदा किया. साथ ही 200 बारातियों को दो-दो कप चाय पिलाई.

40 हजार आबादी का है गांव

40 हजार की शत प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी के इस पूरे गांव में यही परम्परा लागू होती है. गांव में चाहे सामूहिक विवाह सम्मेलन में निकाह हो या फिर परिवार अपने स्तर पर निकाह करा रहा हो. सब पर यह नियम लागू है कि वे दहेज का लेनदेन नहीं करेंगे.

मृत्युभोज पर भी है बैन

कुरीतियों को दूर करने की इस पहल में एक प्रयास और भी है. गांव में किसी की मौत पर मृत्युभोज भी नहीं किया जाता है. इतना ही नहीं गांव में गरीब और विधवा महिलाओं को भी गांव में विशेष महत्व देकर उनकी आजीविका का प्रबंध किया जाता है. विधवा महिलाओं को सोसायटी की तरफ से हर माह पेंशन दी जाती है. यहां तक की गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं के लिए घर भी बनाकर दिए हैं.

गांव में डीजे भी बैन
गांव के सरपंच मोहम्मद सरदार बताते हैं कि हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि कुरीतियों को दूर किया जा सके. हम इसमें सफलता भी रहे है. यहां दहेज लेना-देना तो दूर गांव में डीजे भी नहीं बजाया जाता है. यह सब नियम लागू करने के पीछे उनका मकसद फिजूल खर्ची से बचाना है. गांव के 10 प्रतिशत लोगों को भले की इसमें परेशानी नहीं हो लेकिन जो लोग गरीब हैं, उनके लिए शादी विवाद, मृत्युभोज का खर्च वहन करना असंभव है.

महिलाओं पर नहीं है पाबंदी
इस गांव में महिलाओं पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. गांव में अगर कोई अनजान जाए तो उसे महिलाएं बुर्के में नजर आएंगी तो अदांजा यही लगेगा कि यहां कुरीतियों की भरमार है, लेकिन सच यह है कि महिलाओं को यहां पूरे अधिकार हैं और उन पर कोई पाबंदी नहीं है. नई पीढ़ी की युवतियों के पास यहां एड्रॉइड मोबाइल देखे जाते हैं. शत प्रतशित अल्पसंख्यक आबादी वाला यह गांव पूरे देश के अल्पसंख्यक वर्ग के लिए प्रेरणादायक है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles