आपने सुना होगा वह गाना जिसके बोल है कि ‘ग़म भुलाने कि लिए मैं तो पिए जाऊंगा’ लेकिन यहाँ एक हैरान करने वाली बात सामने आई एक 68 साल का व्यक्ति अपने ग़म भुलाने के लिए एक स्कूल का बच्चा बन जाता हैं.

नेपाल के रहने वाले कामी 10वी कक्षा में पढ़ते है और अपनी आखिरी साँस तक पढ़ना चाहते हैं. कमी ने बतया की पत्नी की मौत कि बाद उनको काफी दुःख हो गया था जिसके बाद वो अपना अकेलापन दूर करने कि लिए स्कूल पढ़ने जाते हैं. बचपन में पैसे की कमी के कारण स्कूली शिक्षा हासिल न कर पाने की वजह से भी वह स्कूल में पढ़ने जाते है.

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अभी वह 10वी कक्षा कि छात्र हैं जहां उनके साथ उनके 15 सहपाठी हैं. 68 साल की उम्र कि कामी भले ही डंडे कि सहारे एक घंटे में स्कूल पहुंचते है परन्तु उनका हौसल उनकी ताकत बनकर उनका साथ देता हैं.

कामी का सपना है की वह टीचर बने इसलिए वह अपनी ज़िन्दगी की आखिरी साँस तक पढाई करेंगे.इसके साथ ही अपने अकेलेपन और ग़म को दूर करने कि लिए वह स्कूल की गतिविधियों में हिस्सा लेते रहते हैं.

Web-Title: A 68 years old man reached school

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